अपने महल में रहने का किराया देता था ये राजा, मां ने लिखी थी ऐसी वसीयत

author Xpose News   1 год. назад
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अकूत संपत्ति का मालिक है सिंधिया परिवार ,खज़ाना मिलने से द...

17-18वीं शताब्दी में सिंधिया राजशाही अपने शीर्ष पर थी और ग्वालियर के किले से लगभग पूरे उत्तर भारत पर शासन कर रही थी..सिंधिया राजशाही एक सफल, समृद्ध राजशाही थी और उसके खजाने में निरंतर वृद्धि होती रही. जब खजाने से तहखाना भर जाता तो उसे बंद करके एक खास कूट-शब्द (कोड वर्ड) से सील कर दिया जाता और नए बने तहखाने में खजाने का संग्रह किया जाता. यह खास कूट-शब्द जिसे बीजक कहा जाता था, सिर्फ महाराजा को मालूम होता था. Enjoy & stay connected with our other youtube channel! ► Bollywood Aajkal: https://www.youtube.com/channel/UCvyZhQGbesuDOoZwTBXrfpg ► Bollywood Pitara: https://www.youtube.com/channel/UC7BUzivaSn1UxiacznNTfkA ► Tandrusti: https://www.youtube.com/channel/UCr3H50ojXN6p_FpZZzCJADg ► History & Mystery: https://www.youtube.com/channel/UC5eZI4m2xFmLwla0YyJziPQ Please Checkout The Video For More Details... For More Such News & Gossips Subscribe now! Bollywood Pitara Please Like & Follow Our Facebook Pages... https://www.facebook.com/bollywoodpitara/ https://www.facebook.com/aajkalbollywood/ https://www.facebook.com/Tandrusti-2092276124381828/

EK KISSA | THE ROYAL STORY OF RAJMATA VIJAYARAJE SCINDIA PART-01

EK KISSA | THE ROYAL STORY OF RAJMATA VIJAYARAJE SCINDIA PART-01 एक किस्सा ऐसी रानी का, जिसने रियासत से सियासत तक अपना इकबाल बुलंद किया। Make sure you subscribe and never miss a new video: https://goo.gl/afiSxh Like Us on Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Patrikamadhyapradesh/ Like us on Twitter: https://twitter.com/patrika_mp Like us on Google+: https://plus.google.com/u/0/112784441256846965848/ Like us on Instagram: https://www.instagram.com/patrikamadhyapradesh/ Visit Our Website: https://www.patrika.com/madhya-pradesh-news/ PATRIKA MADHYA PRADESH is one of most watched Hindi News channel. Here you can watch hindi news, breaking news, politics news, bhopal news,hindi news, hindi news live, news in hindi, latest news, news live. It is the India's new hindi news digital platform that act as the mirror of the society. It helps in bridging the gap between the users and the current happenings in the society all around the world. If you are interested in watching hindi live news as well as breaking news then our YouTube channel will help you in giving you infotainment. Patrika Madhya Pradesh is available across all platforms in India - Analog, Digital Cable and DTH. Lots of videos and lots more in the pipeline. Stay tuned.

अपनी एयरलाइंस बनाई थी ग्वालियर महाराज ने, हर उड़ान में मह...

दूसरी वर्ल्ड वॉर के बाद अंग्रेज सरकार ने अपने कई प्लेन बेच दिए थे. इसी नीलामी में ग्वालियर के महाराज, जीवाजीराव सिंधिया ने,अंग्रेजों से 4  प्लेन खरीद लिए। वे अपनी एयरलाइंस बनाकर बिजनेस करना चाहते थे, लेकिन खुद ने उड़ान का शौकविजया पूरा करना, शुरू कर दिया। जब भी वे प्लेन में उड़ते महारनी राजे सिंधिया को अपने साथ ले जाते। उधर महारानी को प्लेन को बैठने में डर लगता था। Music-http://www.bensound.com

इस गद्दार राजा ने रानी लक्ष्मीबाई को धोखे से मरवा दिया था ...

इस गद्दार राजा ने रानी लक्ष्मीबाई को धोखे से मरवा दिया था ! रानी लक्ष्मी बाई अपनी वीरता और बहादुरी के नाम से जानी जाती है. उनकी वीरता की गाथा आज भी झाँसी में गूंजती है. इतिहास के पन्नो में रानी लक्ष्मी बाई का गौरवगान बहुत सम्मान पूर्वक लिखा गया है. यह रानी एक ऐसी वीरांगना थी. जिसके नाम से अंग्रेजों के होश उड़ जाते थे. अंग्रेजों के साथ एक राजा भी था जो उस समय रानी लक्ष्मी के नाम से डरता था और उसी देश द्रोही राजा के नीचता कारण रानी लक्ष्मी बाई की मौत भी हुई. वह राजा ग्वालियर के महाराज जयाजीराव सिंधिया थे. जयाजीराव सिंधिया देश द्रोही राजाओं में से एक था और यह राजा अंग्रेजों के समर्थक भी था. जयाजीराव का अग्रेजों से लगाव देखकर ग्वालियर की कुछ सेना अपने राजा से नफरत करने लगी थी. इसलिए जब रानी लक्ष्मी बाई कालपी से ग्वालियर आई तब राजा से नाराज बागी सेना रानी लक्ष्मी बाई से जा मिली. रानी लक्ष्मी बाई ग्वालियर के सेनाओं और जनता के समर्थन से ग्वालियर के किले में अपना कब्ज़ा कर लिया. रानी का किले पर कब्जा होते ही जयाजीराव सिंधिया ग्वालियर छोड़कर भाग गए. सबको लगता था की राजा जयाजीराव सिंधिया आगरा भाग गए है. लेकिन यह बात बाद में सामने आई . जब गदर खत्म हुआ. कई वर्षों बाद पता चला कि जयाजीराव सिंधिया आगरा नहीं, बल्कि मुरैना के समीप स्थित आसन नदी के पास बने माता हरिसिद्धि के मंदिर में छुपे हुए थे . यह वही मंदिर है जिसको कुंति भोज, कुंती के पिता द्वारा अपनी राजधानी कुंतलपुर की आसन नदी में बनवाया गया था, जहाँ कुंती ने कर्ण को जन्म देकर नदी में बहा दिया था. जब जयाजीराव इस मंदिर में छुपा था, तब इस मंदिर में पुजारी कालूराम नामक पंडित था, जिसने राजा के छुपने और रहने की व्यवस्था की थी. उनके साथ सेवक और सैनिको के रुकने के लिए भी कमरे बनवाये गए थे. रियासत के रीजेंट दिनकर राव राजबाड़े द्वारा दबाव दिए जाने पर जयाजीराव सिंधिया कुतवार अंग्रेजो के पास आगरा आ गए . जयाजीराव सिंधिया ने अंग्रेजो के साथ ,एक कूटनीति तैयार की और ह्यूरोज द्वारा जयाजी राव को उसके बागी सेना के विरुद्ध लड़ने हेतु तैयार की गई सेना का मुख्या बना दिया गया. जब जयाजीराव अंगेजी सैनिको के साथ रानी से लड़ने आया, तब अपने महाराज को सामने खड़ा देख ग्वालियर की बागी सेनाओं ने रानी को अकेला छोड़ दिया. इसतरह से रानी लक्ष्मी बाई को अंग्रेजो द्वारा धोखे से घेरा गया और रानी लक्ष्मी बाई को मार दिया गया. इस तरह रानी लक्ष्मी बाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गई.

Prince Lakshyaraj Singh Mewar at Holika Dahan Ceremony 2012

The Holika Dahan Ceremony on 7th March, 2012, was held at the royal palace in Mewar. Maharana Arvind Singh Mewar and Prince Lakshyaraj Singh Mewar talked about the importance of the event to the culture of India. It shows the royal family of Mewar performing the proceedings of the ceremony including the lighting of the holy pyre. The ceremony was open for the public and various tourists attended the event. The night ended with fireworks, performances by local artists and an elaborate royal dinner.

अपने महल में रहने का किराया देता था ये राजा, मां ने लिखी थी ऐसी वसीयत
आपातकाल के बाद माधवराव सिंधिया की अपनी मां विजयाराजे से मतभेद सार्वजनिक हो गए थे। इसके बाद उन्हें अपने 400 कमरे वाले शानदार जयविलास पैलेस में किराएदार बनकर रहना पड़ा। माधवराव से उनकी मां इतनी ज्यादा नाराज थीं कि उन्होंने वसीयत तक में लिख दिया था कि उनका बेटा मुखाग्नि नहीं देगा।

30 सितंबर को माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि है। इस मौके पर माधवराव से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने ला रहा है।

- बात उस वक्त की है जब राजमाता विजयाराजे सिंधिया के संबंध अपने इकलौते बेटे और कांग्रेस नेता रहे माधवराव से काफी खराब थे।
- राजमाता माधवराव से बेहद खफा थीं। उनकी नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि उन्होंने अपनी वसीयत में यह तक लिख दिया था कि मेरा बेटा मेरा अंतिम संस्कार नहीं करेगा।
- उन्होंने 1985 में अपने हाथ से लिखी वसीयत में लिखा था कि माधवराव सिंधिया मेरे अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हों।
- हालांकि 2000 में जब राजमाता का निधन हुआ, तो मुखाग्नि माधवराव सिंधिया ने ही दी थी।

जब अपने ही महल में बन गए किराएदार
- मां-बेटे में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ने लगी थी और पारिवारिक रिश्ते खत्म होने लग गए थे। इसी के चलते विजयाराजे ने ग्वालियर के जयविलास पैलेस में रहने के लिए लिए अपने ही बेटे माधवराव से किराया भी मांगा था।
- हालांकि एक रुपए प्रति माह का यह किराया प्रतीकात्मक रूप से लगाया गया था और मां-बेटे के बीच रिश्ते बिगड़ते चले गए।
बेटियों को दे दी सारी जायदाद
- विजयाराजे की वसीयत के हिसाब से उन्होंने अपनी बेटियों को काफी जेवरात और अन्य बेशकीमती वस्तुएं दी थीं।
- अपने बेटे से इतनी खफा थी कि उन्होंने अपने राजनीतिक सलाहकार और बेहद विश्वस्त संभाजीराव आंग्रे को विजयाराजे सिंधिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बना दिया, मां से नाराजगी की वजह से माधवराव को पारिवारिक संपत्ति में बेहद कम दौलत मिली।
आपातकाल से मां-बेटे अलग हुए
- विजयाराजे पहले कांग्रेस में थीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने जब राजघरानों को खत्म कर दिया और उनकी संपत्तियों को सरकारी घोषित कर दिया तो उनकी इंदिरा गांधी से ठन गई थी।
- इसके बाद वे जनसंघ में शामिल हो गई। उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी उस वक्त जनसंघ में शामिल हो गए थे, लेकिन वे कुछ समय ही रहे।
- बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इससे विजयाराजे अपने बेटे से नाराज हो गई थी।

400 कमरों का है जय विलास पैलेस
- जयविलास पैलेस 1874 में बनाया गया था। 400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और यह 12 लाख वर्ग फीट में बना है।
- इस पैलेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है दरबार हॉल। जयविलास पैलेस में रॉयल दरबार की छत से 140 सालों से 3500किलो के दो झूमर लटके हुए हैं।
- दुनिया के सबसे बड़ झूमरों में शामिल इस झूमर को बेल्जियम के कारीगरों ने बनाया था। इन झूमरों को छत पर टांगने से पहले इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथी चढ़ाकर देखे थे कि छत वजन सह पाती है या नहीं।
प्रिंस एडवर्ड के स्वागत में बनवाया जयविलास
- सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव 8 साल की उम्र में ग्वालियर के महाराज बने थे। बड़े होने पर जब इंग्लैंड के शासक प्रिंस एडवर्ड का भारत आना हुआ तो जयाजी महाराज ने उन्हें ग्वालियर आमंत्रित किया।
- उनके स्वागत के लिए ही उन्होंने जयविलास पैलेस के निर्माण की योजना बनाई। उन्होंने एक फ्रांसीसी आर्किटेक्ट मिशेल फिलोस को नियुक्त किया और उसने 1874 में विशालकाय जयविलास पैलेस का निर्माण किया।

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